Story of Roberto Canessa and Nando Parrado | Who Saved Their Team

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Story of Roberto Canessa
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Quick Introduction


You must have heard the story of many brave people, but you have hardly listened to this story before. This is the story of 2 courageous men, Roberto Canessa and Nando Parrado. They had saved the people of their team.


Story Begin from here


The story began when an Uruguayan rugby team and their supporters were on their way from Argentina to Chile in 1972 when their airplane crashed into the Andes mountains.

Illustration of their plane crashed
Illustration of their plane crashed | Story of Roberto Canessa and Nando Parrado

There were 45 people in the airplane, of which 18 died in the first week after the crash. All survivors were trapped at an altitude of 12020 feet, and there was snow all around.

To avoid the strong wind and cold, they thought of staying inside the broken airplane. But after 2 weeks, due to an avalanche, that airplane also broke down, and 8 more people died as well. The rest were trapped for 3 days. Three more people died in the next few weeks.

They had a transistor radio in which they used to listen to the news. They had come to know that the search and rescue mission had started to save them.

There was only snow at that height. There were no trees, animals or water to drink. They were surrounded on all sides by high mountains.

Illustration of snow mountain
Illustration of snow mountain | Story of Roberto Canessa and Nando Parrado

At night the temperature dropped even further. All those survivors were about 19-20 years old. None of them had any survival training, proper clothing, snow boots, fuel to light the fire, drinking water and food.

When it was convinced that the search and rescue team could not come here, one of the survivors, Nando Parrado, decided to climb the mountain. He also thought of taking Roberto Canessa with him.


Roberto Canessa and Nando Parrado decided to climb the mountain


But before climbing the mountain, he waited for 2 months of summer to come. The third person, together with them, decided to climb the hill upstairs. Still, after 3 days, he was sent back because the journey was too long, and Nando Parrado and Roberto Canessa did not want to take more risks.

When both started climbing the mountain, the first challenge for them was to climb the steep slope to go up and understand where they had to go. It took 3 days for them to climb up, and as they were climbing up, they were facing the problem with breathing. But they had to go to the height of 14,774 feet.


They get stuck…Then


After working so hard, when both of them climbed up, they saw from above that the only high mountain is far and wide. There was no way out of there. Even in such a difficult situation, they did not give up, but they planned to go west towards a distant valley.

They had no rope, no boots, no ice axes, no crampons, no tent, no map, no compass. After sunset, the temperature used to go down to 20 degrees.

Both of them had a sleeping bag to sleep in, but it was torn. That too was sewn by the rest of the Survivors, pasting some bandages and making them workable. Both had hypothermia, and it could affect their lives at any time.


Found the way


For the next seven days, both kept descending and descended 4,676 feet and about 54 km. While descending, they faced many challenges along the way, like avalanches, raging streams, and steep rocky slopes. During this, many such accidents happened to them, which could have cost their life.

After coming down, they had now come to a valley where the 3 horsemen saw them. The horsemen informed the rest of the authorities and kept Nando and Roberto with them to look after them.

The next day two Chilean army helicopters (with Nando aboard one to guide them) arrived at the same crash site. There 14 survivors were rescued.

Their lives were saved because Nando and Roberto took a considerable risk. If those people were sitting like the rest of the people, then probably all the people would have died.


Hindi Version


छोटा सा introduction


आपने कई बहादुर लोगों की कहानी सुनी होगी लेकिन यह कहानी आप जो पढ़ेंगे शायद ही कभी पढ़ी या सुनी होगी। यह 2 साहसी पुरुषों, रॉबर्टो कैनेसा और नंदो पाराडो की कहानी है। उन्होंने अपनी टीम के लोगों को कैसे बचाया था।


कहानी यहाँ से शुरू होती है।


कहानी शुरू होती है जब उरुग्वे रग्बी टीम और उनके समर्थक 1972 में अर्जेंटीना से चिली की यात्रा कर रहे थे, जब उनका विमान एंडीज पहाड़ों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

विमान में 45 लोग सवार थे, जिनमें से 18 की दुर्घटना के बाद पहले सप्ताह में मौत हो गई। बाकी बचे हुए लोग 12,020 फीट की ऊंचाई पर फंस चुके थे और चारों ओर सिर्फ बर्फ ही बर्फ थी।

तेज हवा और ठंड से बचने के लिए उन्होने टूटे हुए विमान के अंदर रहने का फैसला किया। लेकिन 2 हफ्ते बाद हिमस्खलन (avalanche) की वजह से वो टूटा हुआ विमान भी दब गया और 8 और लोगों की और मौत हो गई. बाकी 3 दिन फंसे रहे। अगले कुछ हफ्तों में तीन और लोगों की मौत हो गई।

उन लोगो पास एक ट्रांजिस्टर रेडियो था जिसमें वह समाचार सुनते थे। उन्हें पता चला था कि उन्हें बचाने के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है। उस ऊंचाई पर केवल बर्फ थी। वहाँ पर कोई पेड़, जानवर या पानी नहीं बिलकुल नहीं था। वे चारों ओर से ऊँचे पहाड़ों से घिरे हुए थे।

रात के तापमान में और गिरावट हो गयी। सभी लोगों की उम्र लगभग 19-20 वर्ष थी। उनमें से किसी के पास कोई जीवित रहने का प्रशिक्षण, उचित कपड़े, बर्फ के जूते, आग जलाने के लिए ईंधन, पीने का पानी और भोजन कुछ नहीं था।


रॉबर्टो कैनेसा और नंदो परराडो ने पहाड़ चढ़ने का फैसला किया।


जब यह आश्वस्त (convince) हो गया कि खोज और बचाव दल यहां नहीं आ सकते हैं, तो बचे हुए लोगों में से एक, नंदो परराडो (Nando Parrado) ने पहाड़ पर चढ़ने का फैसला किया। उन्होने रॉबर्टो कैनेसा (Roberto Canessa) को भी अपने साथ ले जाने की सोची।

लेकिन पहाड़ पर चढ़ने से पहले उन्होंने गर्मी के दो महीने आने का इंतजार किया। उनके साथ तीसरे व्यक्ति ने भी उनके साथ मिलकर पहाड़ी पर चढ़ने का फैसला किया। 3 दिनों के बाद, वो तीसरे व्यक्ति को वापस भेज दिया गया क्योंकि यात्रा बहुत लंबी थी, और नंदो पाराडो और रॉबर्टो कैनेसा कोई और जोखिम नहीं लेना चाहते थे।

जब दोनों ने पहाड़ पर चढ़ना शुरू किया, तो उनके लिए पहली चुनौती खड़ी ढलान पर चढ़ना और यह पता लगाना था कि वे कहाँ जा रहे हैं। उन्हे ऊपर चढ़ने में 3 दिन लगे और जैसे-जैसे वह ऊपर चढ़ रहे थे, उन्हे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। लेकिन उन्हें 14,774 फीट की ऊंचाई तक जाना था।


ऊपर पहुँच कर मिली निराशा।


इतनी मेहनत करने के बाद जब दोनों ऊपर चढ़े तो उन्होंने ऊपर से देखा कि दूर-दूर तक सिर्फ ऊंचे पहाड़ है। वहां से निकलने का कोई रास्ता नहीं था। इतनी कठिन परिस्थिति में भी उन दोनों ने हार नहीं मानी, और उन लोगो ने पश्चिम की ओर एक दूर घाटी की तरफ जाने की योजना बनाई।

उनके पास न तो रस्सी थी, न जूते, न बर्फ की कुल्हाड़ी, न crampons (कील वाले जूते) , न तम्बू, न नक्शा, न कंपास था । सूर्यास्त के बाद तापमान 20 डिग्री और नीचे चला गया।

दोनों के पास सोने के लिए स्लीपिंग बैग था, लेकिन वह फटा हुआ था। वह भी बाकी लोगों द्वारा सिल दिया गया था, उस स्लीपिंग बैगको काम करने योग्य बनाने के लिए कुछ पट्टियाँ चिपका दी गई थीं। दोनों को हाइपोथर्मिया था, और यह किसी भी समय उनके जीवन को प्रभावित कर सकता था।


मिला नीचे उतारने का रास्ता।


अगले सात दिनों तक दोनों नीचे की तरफ उतरते रहे और 4,676 फीट और लगभग 54 किमी नीचे उतरे। उतरते समय, उन्हें रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जैसे हिमस्खलन, उग्र धाराएँ और खड़ी चट्टानी ढलान। इस दौरान उनके साथ कई ऐसे हादसे हुए, जिनमें उनकी जान भी जा सकती थी।

नीचे आने के बाद, वे एक घाटी में थे जहाँ 3 घुड़सवारों ने उन्हें देख लिया। घुड़सवारों ने बाकी अधिकारियों को सूचित किया और नंदो और रॉबर्टो को अपने साथ ले गए।

अगले दिन चिली की सेना से दो हेलीकॉप्टर (एक पर नंदो भी मौजूद थे उनका मार्गदर्शन करने के लिए) उसी दुर्घटना स्थल पर पहुंचे। वहां 14 बचे लोगों को बचाया गया।

उनकी जान बच गई क्योंकि नंदो और रॉबर्टो ने बड़ा जोखिम उठाया। अगर वो लोग बाकी लोगों की तरह बैठे होते तो शायद सभी की मौत हो जाती।


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